चेतक और प्रताप


Kavi vishal brahmbhatt2022/12/03 13:19
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चेतक और प्रताप

*मेवाड़धीराज एकलिंग दीवान महाराणा प्रताप पर कविताए एव मुक्तक __END_OF_PART__IMG_20221125_22291214_gallery.jpg__END_OF_PART__ 1. चाहते तो हम भी लिख सकते थे, महबूब के ज़ुल्फो की छावं को... पर परे हटकर हम उन ज़ुल्फो से, लिखते है राणा सांगा के घाव को.....


2. फिर से अस्सी घावों वाली छाती मांगती है माँ, बातों और समझौतों की नही,तलवारों वाली नीति मांगती है माँ... इन ग़द्दारों को सरेआम फाँसी दो चौराहों पर,, या फिर रक्तरंजित हल्दी वाली घाटी मांगती है माँ.....


3. मन मे महाराणा प्रताप,सीने पर पहचान लिए फिरते हैं, डरने वाले हम नही, सिंहो के भी दांत गिना करते हैं... जीते है शान से स्वाभिमान के साथ,, कितने है देश में जहरीले साँप, हम उनके के फन कुचला करते हैं.....


4. यह वो मेवाड़ी मिट्टी हैं, संघर्षों की माटी है यहां मुंड कट गए - धड़ लड़े ऐसी बलिदानी परिपाटी है कभी मुगलों ने, कभी जयचंदो ने घात किया घर के भेदी बेरियों ने, मिलकर आघात किया सांगा सा शेर जन्मा,सिंहो कि शक्ति है कण कण मेवाड़धरा में माँ मीरा की भक्ति है यहां की अरावली भी शीश झुकाती है जब क्षत्राणियां मातृभूमि के लिए जौहर कर जाती है यह वो मेवाड़ी मिट्टी है जहां सखा झाला मान हुआ माटी की रक्षा के खातिर, बेटे चंदन का बलिदान हुआ यह तो वो मिट्टी है, जहां तलवारे सीने से टकराकर टूट जाती है यह तो वो धरती है जहां के जर्रे जर्रे से वीरता की खुशबू आती है


5. जब तक जान है, सम्मान लिखूंगा, मेवाड़ का स्वाभिमान लिखूंगा... जिसके सीने से टकराकर तलवारें टूट जाती थी,, में उस राणा प्रताप को भगवान लिखूँगा.....


6.माँ की ममता दुश्मन से लड़ सकती थी पर नमक का कर्ज चुका देती है, मेवाड़ की रक्षा के खातिर,चंदन को उदय बता देती है... ले सिर पर उदय को, मेवाड़ी मान बचाती है,, धन्य हो माता पन्ना वो, आज जगत माँ कहलाती है.....


7. व्यक्तित्व का का धनी है वो, अमर जिनकी कहानी है, रक्त से लिखा था इतिहास जिन्होंने, जिंदा अब तक निशानी है... कालभोज नाम दिया, यह मिट्टी बलिदानी है,, अरे धड़ कटे बलिदान हुए, यह मिट्टी राजपूतानी है.....


8. अपने इरादों से रण में हुंकार मचाया करता था काटकर शीश मुगलों के प्यास बुझाया करता था... औरंगजेब भी जिसे बल लालच से न डिगा सका अपने एक बार से शत्रु को मिटाया करता था..... वीर दुर्गादास राठौड़।


9. चाहते तो हम भी लिख सकते थे, महबूब के ज़ुल्फो की छावं को... पर परे हटकर हम उन ज़ुल्फो से, लिखते है राणा सांगा के घाव को.....


10.लिया हे प्रण फिर वही रक्त याद दिलाऐगे, अकबर को महान बताने वाले को राणा_प्रताप के अमर व्यक्तित्व की छवि दिखाऐगे... महाराणा ने मातृभूमी के खातीर जो समर किया फिर क्यो इतिहासकारो ने उस ध्रुत मुगल को बडा बताकर इतिहास मे अमर किया..... कहता हू मै कि अब प्रताप भक्तो को फिर से जागना हे प्रताप के त्याग,बलिदानी जीवन का सच्चा मुल्य आकंना है...!!


11. मानव के साथ यहा मिलकर,पशु भी इतिहास रचते हे चेतक जैसे घोडे भी तो,जय स्वतन्त्रता दुहराते हे अध्द्रुत भाव समपॅण का,जब जीवन का दाव लगाया था राणा ने जब रण में कोहराम मचाया था यदि किच्शित ठिठक गया होता इतिहास बदल गया होता, अनहोनी भी घट सकती थी अगर घिर जाता रण मे चेतक ने सलीम के हाथी के मस्तक पर टाप अडाया था तब राणा ने अपना भाला दुश्मऩ की ओर बढाया था..... जय मेवाड़


12. वीरो की है संताने जोश हम में भरपूर है लाशों के ढेर लगा दिए, किया मुगलों का घमंड चकनाचूर है... गुलामी का घी हम नही खा सकते हमें स्वाभिमानी घास की रोटी मंजूर है...


13. कदर कायदा री मिटी बोली वीरा री परिपाठी अठे जले जोहर-ज्वाला,री स्वाभिमानी माटी अठे गूँजी अठे चेतक के टापा, रक्तरंजित हल्दीघाटी अठे रणभेरया री हुंकार अठे महाराणा प्रताप री दहाड़ अठे पन्ना रो बलिदान अठे भामाशाह जेड़ा दान अठे मीरा माँ रो प्रेमभाव अठे पद्मिनी रो आत्मसम्मान अठे अस्यो राजस्थान अठे प्यारा-प्यारा लागे रजवाड़ा ऊंचा-ऊंचा पहाड़ अठे हवेली, रण, जौहर तलवारा का चित्तौड़,उदयपुर, सुंदर मेवाड़ अठे मरुभूमि पर झील बणी, ग़जबन अठे बणी-ठनी मोटी मुछया, पगड़ी शान अठे इणरी रजकण पर गुमान अठे मारवाड़ की शान अठे जोधानों महान अठे जयपुर, हाड़ौती, जैसाण अठे बिकाणो,शेखावाटी, अस्यो राजस्थान अठे एकलिंग सेठ सावंरिया,सालासर धाम अठे रामसा पीर रो पैगाम अठे करणीमाता,श्रीनाथ जी, खाटूश्याम अठे


14. क्षत-विक्षत रण में घिरे वीरो की हुंकार हुई हल्दी वाली मिट्टी में, रक्तरंजित ललकार हुई जिसके शरीर से टकराकर दुश्मन की तलवारें टूटी थी स्वर्णिम इतिहास में राणा की जयकार हुई अकबर को था भय, सामने कभी ना आया था यही दुख था जीवनभर, मेवाड़ जीत ना पाया था राष्ट्रभक्ति की अमरगाथा लिखने मेवाड़ी राणा आया था मुगलों का काल बनकर स्वयं महाकाल आया था चेतक पर सवार राणा जब दुश्मन को देखकर मचलता था हाथ मे भाला लिए, चेतक हाथी पर चढ़ता था झाला मन्ना, राणा पूंजा, तोमर जैसे वीरों की टोली थी शिव तांडव कर, खून की होली खेली थी


15 . जिसकी गाथा को सुनकर रक्त उबलने लगता है मरा हुआ व्यक्ति भी उठकर चलने लगता है स्वाभिमान के उस दीवाने को महाराणा प्रताप कहते हैं शीतल जल को छूले तो आग उबलने लगता हैं गुलामी की जंजीरे तोड़कर सबसे आगे निकलता है सांगा का वो वंशज दुश्मन की छाती चढ़ता है धड़ कटे बलिदान हुए आन बान शान पर मिट जाते हैं तब जाकर कही महाराणा प्रताप कहलाते हैं इतिहासों में जो अमर है उनको नीचा दिखाया है थूकता हूं ऐसे इतिहासकारो पर, जिन्होंने अकबर को अपना बाप बताया है शत्रुओं के काल थे तुम, माँ भारती के लाल हो तुम आन हो तुम, शान हो तुम, खुद में ही एक कमाल हो तुम यह वो मेवाड़ है जहाँ चेतक की टॉपे गुंजी है महाराणा प्रताप की एक दहाड़ से अकबर की टांगे धुंजी है वीरों की इस माटी पर अपमान रोकने आया हूँ रुकी हुई इन सांसो में जान फूंकने आया हूं तप रही भूमि का तापमान बताने आया हूं में मेवाड़ी मिट्टी का शेर स्वाभिमान जगाने आया हूँ


16. ना में कवि हूं,ना लेखक हूँ, ना खुद को शायर कहता हूं... कुछ शब्द फ़िरोने बैठा हूँ, बस महाराणा को भगवान कहता हूँ.....


17. बलिदानी धरती की धड़कन गीत गाती हैं मेवाड़ी शेरों का स्वाभिमान जगाती है चेतक की टॉपे टप टप,आवाज आती है अकबर की सेना थर्रा जाती है पन्ना वाला त्याग यहां,शीश चढ़ाती है राणा की यह धरती अनुपम गीत सुनाती है झाला मन्ना, गोरा बादल, जयमल कल्लाजी की माटी है धरती ऐसी यह तो मीरा के भजन सुनाती है मातृभूमि के लिए रानी जौहर कर जाती है


18. देशभक्ति की गाथा गाने आया हूं यह कर्ज है उस राणा का सबको बतलाने आया हूं जहाँ जन्म आजाद हुए वो धरती ज़ुल्म से चिल्लाई थी हाथ ना आया अंग्रेजो के खुद को गोली चलाई थी जिसने हँसते हँसते उस फंदे को चूमा उसने भी अंग्रेजी सरकार हिलाई थी खूब लड़े मराठा प्राणों को वांरा था देशभक्ति गाने आया हूं मुझपर कर्ज है राणा का जिसने रक्त से सींचा कण माटी का बलिदान पुकारें हल्दीघाटी का जौहर की परिपाटी का अरे खूब लड़ी थी वीरानी झाँसी वाली रानी का ऐसी थी हाड़ी रानी शीश काटकर दे देती है माटी की रक्षा में दुश्मन को दो हिस्सों में बाट देती है


19. यौद्धा तो लड़े रण में,मान रखा माटी का युद्ध हुआ ऐसा, क्या मंजर था उस हल्दीघाटी का... यहां मुंड कटे रुण्ड लड़ गए इतिहास हमे बताता है,, "यह राजस्थान है साहब", यहां सिर्फ यौद्धा ही नही, एक घोड़ा भी देशभक्त कहलाता है.....


20. जब इस धरती की पावन माटी अनुपम गीत सुनाती है इस मिट्टी से सौंधी खुशबू राष्ट्रभक्ति की आती है मातृभूमि के लिए मर मिटने वालो का बलिदान यहां मिलता है जहां अरावली भी अपना शीश झुकाती है यह वो पावन धरती जिसने पावन अपना इतिहास सजाया है राणा प्रताप, सांगा, जयमल जैसे वीरो को उपजाया है इस धरती के हर जर्रे जर्रे से वीरता की खुशबू आती है प्राण जाए पर वचन न जाये यह माटी हमे सिखाती है इस मिट्टी के कण कण से लिखी मिलेंगी जौहर गाथा प्राण दिए हंसते हंसते, जलती चिता में कूदी माता ऐसी ही एक गाथा दी है मेवाड़ की इस परिपाटी ने सैकड़ों युद्ध झेले छाती पर इस माटी ने इतिहासों में उल्लेख इसका,सदा यह सिरमौर रहा बिजासन डूंगरी से लेकर सागर यहां स्वयं चामुंडा यहां विराजती है साहब यह तो वो मिट्टी है जहां अरावली भी शीश झुकाती है

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