
एक बार की बात है एक राजा था जो कि बहुत ही प्र पराक्रमी योदा था और उसने अपने साम्राज्य का विस्तार भी बहुत किया हुआ था वह पराक्रम एक योद्धा होने के साथ-साथ चतुर और बुद्धिमान भी था इसीलिए वह किसी अन्य राजा के शिकंजे में जल्दी से नहीं फंसता था साम्राज्य विस्तार की लालसा के कारण उसने अपने पड़ोसी राज्यों के राजाओं के साथ बेर पाल रखा था चतुर और बुद्धिमान होने के कारण उसे कोई मौत नहीं दे सकता था सभी राजा उस राजा से घबराते थे अब वह बहुत ही वृद्ध हो चुका था इसलिए हृदयाघात के कारण उसकी मृत्यु हो जाती है
बात आती है राज्य की राजपाट को संभालने की उस राजा के 1 पुत्र था जो राज्य के राज्यपाल को संभालने के लायक नहीं था क्योंकि उसका दिमाग समय के साथ विकसित नहीं हुआ वह अपने पिता की तरह बुद्धिमान चतुर और प्राकर्मी नहीं था इस कारण उसकी मां को हर वक्त यह चिंता सताती थी कि अगर पड़ोसी राज्यों के राजाओं ने राज्य पर आक्रमण कर दिया तो हमारा क्या होगा राजपाट का क्या होगा और प्रजा का क्या होगा यही बात उसी दिन रात चिंता में डूबे रखती थी
और उसकी मां सब राजपाट छोड़कर सन्यास ले कर भगवान की शरण में चली जाती है और वहीं पर ठाकुर जी आराधना करती है और जाते समय अपने पुत्र को एक डिब्बी देकर चली जाती है और कहती है जब परिस्थिति तुम्हारी विपरीत हो तब इस डिब्बी को खोल कर देख लेना
और कुछ दिनों पश्चात सभी पड़ोसी राज्य के राजा मिलकर उस राजा के पुत्र के साम्राज्य पर चढ़ाई कर दी और उसके साम्राज्य को चारों ओर से घेर लिया और उस पर आक्रमण कर दिया जब परिस्थिति उसके विपरीत हुई तब उसे याद आया अपनी मां के द्वारा दी हुई डब्बी तो वह जल्दी से भागकर महल में गया और अलमारी से डब्बी निकालकर उसे खोला तो उसने पाया एक चिट्ठी उस में यह लिखा हुआ था।
यह समय भी निकल जाएगा।
तुम उसी समय अपने साम्राज्य को छोड़कर वहां से भाग गया वह कहीं पर जाकर दूसरे राज्य में सेठ के यहां नौकरी करने लगा और धीरे-धीरे करके कुछ सालों बाद उसने अपने साम्राज्य का विस्तार वापस कर लिया जब वह पलंग पर बैठ कर आराम फरमा रहा था तभी उसकी मां की डिब्बी याद आई और उसने मंगवाई और उसे खोल कर देखा
और वह चिट्ठी पढ़कर बहुत जोर से हंसा और कहा कि मां ने सही कहा था कि ऐसे में भी निकल जाएगा
तो इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि कोई भी परिस्थिति आ जाए कोई भी सिचुएशन हो हमें उस स्थिति का सामना करना चाहिए अगर ज्यादा ही परिस्थिति हमारे विपरीत हो जाए हमें घबराना नहीं है बल्कि यह सोचना है कि यह समय भी निकल जाएगा समय किसी का इंतजार नहीं करता वह आगे बढ़ता ही रहता है इसीलिए किसी भी परिस्थिति से घबराना नहीं चाहिए
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