🙏 स्वयं से परिचय 🙏
कहते हैं कि प्रकृति के इस बिरल रूप में मनुष्य प्रमुख विधा है इस जीवन मंच में सबसे सुंदर पत्र मनुष्य अपने जीवन को विभिन्न रंगों से सुशोभित करता है इसी रूप में समस्त मौलिक या कहें कि वैदिक गुणों के अधीन मनुष्य अपने जीवन का परिचायक है और अंत में मानवता की एक विषम परिस्थिति को संपूर्ण रूप में संचय करते हुए मानवता को सर्वोपरि रखता है