
स्वयं श्रेष्ठ के रूप में, मानवता का परिचय हूं । हूं स्वयं अद्भुत जिस रूप में, वो कर्तव्यों का संचय हूं। जिन् रूपों में निर्मित खुद में, उन व्यवहारों से तनमय हूं। हूं स्वयं जीवन के पलों में, वह जिज्ञासु अभिनय हूं। अगर बात करूं जीवन की, ज्ञान विधा का परिचायक हूं। गुरु की बातों का जीवन में, अमल रूप में साधक हूं। जिन पलों में मधुर रूप की, सम उत्पल के जातक हूं। वह लिखता हूं अदम रूप की, मृदु बाणी में भांतक हूं ।
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