मेरी लेखनी एक मिशन


Ramratam2022/02/21 03:46
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मेरी लेखनी एक मिशन की पहली प्रति ई बुक के रूप में पेस करते हुए मुझे बहुत खुशी महसूस हो रही है आसा करता हु मेरी रचनाएं आपको पसंद आएंगी अगर मेरी लेखनी में मुझसे कोई भूल हुई हो तो में आपसे क्षमा प्रार्थी हूं अगर आपको मेरी रचनाएं पसंद आए तो में जल्द ही ई बुक पर अगली प्रति आप सभी पाठको के बीच जल्द ही पेस करने का प्रयास करूंगा साथियों मेने अपनी रचनाओं में मनुवाद पर प्रहार किया है ये जानते हुए भी की कुछ लोग मेरी रचनाओं की आलोचना करेंगे और कुछ लोग कुछ हद तक प्रसंसा भी करेंगे मैने सामाजिक कुरीतियों को अपनी कलम के माध्यम से अपनी लेखनी में उतरने का भरपूर कोसीस की है जोकि मेरे हद्द्य को सदेव चुभती रही है मेने मेरी लेखनी एक मिशन में कुछ सामाजिक कुछ राजनेतिक पर लिखी रचनाओं का समावेश किया है लेखक:–रामरतन सुड्डा

बेटी बचाओ बेटी फेंको मत

मत फेको बेटी को बेटी तेरे घर को आबाद करने आई है मां

दुनिया की चक्का चौंध से भ्रमित होकर ना सोचो की बेटी तुम्हे बर्बाद करने आई ह मां

इतिहास खोल और देख क्या कभी किसी आंगन की गरिमा किसी बेटी ने मिटाई है मां

मत फेको बेटी को बेटी तेरे घर को आबाद करने आई है मां

अपने बेटों की काली करतूतों के किस्सों को क्यों बेटी के सर लगती है मां

तुमने मिटाकर बेटी को बेटों की काली करतूतें छुपाई है मां

बलात्कार किया बेटों ने हर बार ,क्या कभी बेटी किसी के बेटे के बलात्कार की गुनहगार पाई है मां

बलात्कारी बेटों को दी पनाह तुमने बेगुनाह बेटी को बार बार ठुकराती है मां

बेटी पलती रही मिट्टी की गोद में ,तेरे आंचल की छाव बेटों ने पाई है मां

मत फेको बेटी को बेटी तेरे घर को आबाद करने आई है मां

बेटों ने दुदकारा है अपने मा बाप को दौलत की खातिर ,

दौलत की खातिर किस बेटी ने मां बाप को आंख दिखाई है मां

मत समझ बेटी को बोझ एक न एक दिन चली जायेगी पराया घर बसाने

बेटी धूप नहीं परछाई ह मां

मत फेको बेटी को बेटी तेरे घर को आबाद करने आई है मां

रामरतन सुड्डा 🖊️

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