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Dushera

नवरात्रि की सप्तमी तिथि नवदुर्गा में से सबसे भयंकर रूप देवी कालरात्रि को समर्पित है। सप्तमी तिथि पर इन देवी का पूजन किया जाता है। दुष्टों-असुरों और नकारात्मक ऊर्जा का संहार करने वाली इन देवी के आगमन से शत्रु भय से कांप जाते हैं। देवी का वर्ण घोर काला होने के कारण इन्हें कालरात्रि के नाम से पूजा जाता है। देवी गले में विद्युत की माला, हाथ में खडग लिए हुए गर्दभ की सवारी करती है। देवी के रूप से काल भी कटता है। देवी का यह रूप अपने भक्तों के लिए अत्यंत करुणामयी है। कालरात्रि माता का पूजन करने से भक्तों पर किसी भी प्रकार का संकट, भूत बाधा, शत्रु भय एवं नकारात्मकता का प्रभाव नहीं रहता। देवी को रात्रि का पहर समर्पित है इसलिए रात के समय इनका पूजन और साधना का विशेष लाभ मिलता है। रात्रि के समय देवी के मंत्रों का उच्चारण करते हुए पश्चिम दिशा में बैठ कर उनके विग्रह का ध्यान करें एवं सात्विक भोजन का भोग लगाएं।