
अग्रीकल्चरल रेवॉलुशन इतिहास का सबसे बड़ा फ्रॉड है। जी हा ये कहानी उस इतिहास की है जो युवाल नोवा हरारी की किताब से हमने ली है ।
१०००० साल पहले इंसान अपना पूरा जीवन एक बंजारे की तरह ही बीतता था । वो खाने , रहने और प्रकृति के रूप से लड़ने के लिया भटकता था । उसे हंटर गैदरर कहते थे । कुछ सा लों बाद यानि लगभग ८००० साल पूर्व उसे ये पता चला की कुछ पौधों को वो बोकर उसे उगाया जा सकता है ,जिससे खाने की समस्या को खत्म किया जा सकता है । उसने अनाज बोया , कुछ जानवर को भी पालतू बनाया । इससे खेती का विकास हुवा । इंसान के पास अनाज अब बहोत शेष रहने लगा मगर किस कीमत पर ?
इंसान नए पौधों को उगाने मे जो मेहनत की और जिन चीजों को छोड़ दिया उससे उसे क्या मिला ? उसका शरीर जो काम करने के लिए नही बना वो करने के लिए वो विवश हो गया ।इधर इस शेष रहते अनाज ने, नहीं इंसान का डाएट अच्छा बनाया और नहीं वो इंसान को पहले से ज्यादा ताकदवर बनाया । महज इंसान के एक तबके का निर्माण किया जो खुद अनाज पैदा करे मगर उस किसान को भी क्या मिला? सिर्फ एक बत्तर जीवन जो खेती के खोज से पहले अच्छा था ।
तो ऐग्रिकल्चर मे हमे लगता रहा की वो गेहूं है जिसे हमने अपने आसपास लगाया मगर क्या पता वो गेहूं ही हो जिसने अपने घर मे हमे लगाया हो । अंग्रेजी मे ये ज्यादा खूबसूरत लगेगा की we did not domesticated wheat but its wheat domesticated us .
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