आदिकवि वाल्मीकि कृत रामायण (बालकांड, विंशः सर्गः)


ゲスト2023/02/28 01:49
フォロー

महाबलो महावीर्यो राक्षसैर्वहुभिर्वृतः।

श्रूयते हि महावीर्यो रावणो राक्षसाधिपः।।17।।
(वह स्वयं बड़ा बलवान् तथा बड़ा पराक्रमी है और उसके अनेक राक्षस अनुयायी हैं। सुनते हैं कि वह महावीर रावण राक्षसों का राजा है।।17।।)

सक्षाद्वैश्रवणभ्राता पुत्रो विश्रवसो मुनेः।
यदा स्वयं न यज्ञस्य विघ्नकर्ता महाबलः।।18।।
(वह साक्षात् कुबेर का भाई और विश्रवा मुनि का पुत्र है। वह महाबली छोटे यज्ञों में स्वयं तो विघ्न नहीं करता, किन्तु।।18।।)

तेन संचोदितौ द्वौ तु राक्षसौ सुमहाबलौ।
मारीचश्च सुबाहुश्च यज्ञविघ्नं करिष्यतः।।19।।
(उसकी प्रेरणा से बड़े बलवान् दो राक्षस जिनके नाम मारीच और सुबाहु हैं, ऐसे यज्ञों में विघ्न डालते हैं।।19।।)

इत्युक्तो मुनिना तेन राजोवाचमुनिं तदा।
न हि शक्तोऽस्मि संग्रामे स्थातुं तस्य दुरात्मनः।।20।।
(विश्वामित्र के इन वचनों को सुन महाराज दशरथ उनसे कहने लगे कि, मैं तो उस दुरात्मा का सामना नहीं कर सकता।।20।।)




シェア - आदिकवि वाल्मीकि कृत रामायण (बालकांड, विंशः सर्गः)

ゲストさんをフォローして最新の投稿をチェックしよう!

フォロー

0 件のコメント

この投稿にコメントしよう!

この投稿にはまだコメントがありません。
ぜひあなたの声を聞かせてください。